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शिक्षकों के स्थानान्तरण के लिए नई नियमावली तैयार, कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

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July 16, 2026 • 02:00 AM

शिक्षकों के स्थानान्तरण के लिए नई नियमावली तैयार, कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार
देहरादून। उत्तराखण्ड में शिक्षकों के स्थानान्तरण को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई स्थानान्तरण नियमावली तैयार कर ली गई है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद तबादलों की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।
प्रमुख बदलाव
सुगम-दुर्गम व्यवस्था समाप्त: नई नियमावली में पारंपरिक सुगम-दुर्गम वर्गीकरण को समाप्त कर पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्र की व्यवस्था लागू की जाएगी।
बोर्ड परीक्षा परिणाम को मिलेगा महत्व: शिक्षकों के स्थानान्तरण में अब बोर्ड परीक्षा परिणाम भी एक महत्वपूर्ण आधार होगा।
न्यूनतम सेवा अवधि अनिवार्य: प्रत्येक शिक्षक एवं कर्मचारी को निर्धारित क्षेत्र में न्यूनतम सेवा अवधि पूरी करनी होगी। इससे बार-बार स्थानान्तरण की प्रवृत्ति पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
पूर्व निर्धारित सेवा अवधि: नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को पहले से ही यह जानकारी होगी कि उन्हें किस क्षेत्र में कितने समय तक सेवा देनी होगी।
क्षेत्रवार नई व्यवस्था
नई नियमावली के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है—
उच्च पर्वतीय क्षेत्र:
पिथौरागढ़
उत्तरकाशी
चमोली
बागेश्वर
निम्न पर्वतीय क्षेत्र:
टिहरी
रुद्रप्रयाग
अल्मोड़ा
चम्पावत
नैनीताल
पौड़ी
देहरादून (पर्वतीय क्षेत्र)
मैदानी जिलों को अलग श्रेणी में रखा जाएगा, जहां स्थानान्तरण एवं सेवा अवधि के अलग प्रावधान लागू होंगे।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होंगे नियम
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई इस नियमावली को कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद अधिसूचित किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में शिक्षकों के स्थानान्तरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, संतुलित और परिणाम आधारित होने की उम्मीद है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध समाचार-पत्र की कटिंग के आधार पर तैयार किया गया है। अंतिम नियम एवं प्रावधान राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक शासनादेश/अधिसूचना के अनुसार ही प्रभावी होंगे।

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